क्लींजिंग और रिफ्लेक्सोलॉजी
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चित्र में नंबर चिन्हित रिफ्लेक्स बटन गौर से देखें | पहली क्रिया : त्वचा पर उपयुक्त क्लीन्ज़र लगाकर फैलायें | एक मिनट तक हलकी मसाज करें ।अन्त में चिन्हित किये गये रिफ्लेक्स बटन्स बाएं हाथ की तीसरी उंगली से हल्का दबाव देते हुए दस तक गिनकर क्लॉक वाइज और एंटी क्लॉक वाइज घुमाएं ।यह प्रक्रिया प्रतिदिन दोहराने से त्वचा तथा पूरे शरीर को सुन्दर और स्वस्थ रखने वाले हार्मोन्स का शरीर में प्रवाह होना आरम्भ हो जाता है । इस प्रक्रिया को लगातार मात्रा सात दिन करने पर आप को अपनी त्वचा में बदलाव नज़र आने लगता है | आप के स्वभाव का चिड़चिड़ापन कम होने लगता है | आलस खत्म होने लगता है और आप जीवन्त महसूस करती है | तीसरी उंगली से ‘बना अमोरी’ नाम की नस (वेज) सीधी हमारे ह्रदय तक जाती है| अगर इस ऊँगली से रिफ्लेक्स बटन्स पर दबाव दिया जायेगा तो वह संपूर्ण शरीर पर स्वास्थ्यवर्धक असर डालेगा यह निश्चित है | तीसरी उंगली : बायें हाथ की उँगलियों को अंगूठे की तरफ से गिनना शुरू करें तो चौथी उंगली पाएगी ।अगर प्रथम से गिनेंगी तो तीसरी उंगली जो आयेगी वही वह महत्वपूर्ण उंगली होगी ।इसे अंग्रेजी में रिंग फिंगर कहते हैं | हमारे शरीर में 750 लिम्फ नोड्स हैं | इनमे से लिम्फ नोड्स चेहरे पर हैं । लिम्फ नोड्स एवं लिम्फ डॉट्स का जाल पूरे शरीर में फैला हुआ है ।हमारे शरीर से विजातीय द्रव्य बाहर निकालने में लिम्फैटिक सिस्टम का विशेष योगदान होता है | जब हम रिफ्लेक्स बटन्स को दबाते हैं तो लिम्फ नोड्स में एकत्रित विजातीय द्रव्य /गन्दगी लिम्फैटिक डक्टस के माध्यम से मुख्य डक्ट (सिस्टर्ना चाइला)में पहुँच कर शरीर के बाहर चला जाता है | रिफ्लेक्स बटन्स पर दबाव के कारण लिम्फ विजातीय द्रव्य की चाल बढ़ जाती है और शरीर को उतना ही जल्दी उससे मुक्ति प्राप्त हो जाती है | लिम्फ का शरीर से बाहर आना प्राकृतिक है किन्तु निरंतर व्यायाम, अनुशासनिक जीवन शैली, मालिश उबटन आदि से यह प्रक्रिया तेज गति से कार्य करती है | यदि यह कार्य हम और वैज्ञानिक तरीके से करें या यूँ कहें कि रिफ्लेक्स बटन्स पर सही दबाव डालकर करें ।तो इसका अत्यधिक एवं शीघ्रतम लाभ मिल सकता है । नियमित रूप से यह प्रक्रिया अपनाने से आंखों के नीचे सूजन, मफिन्स, गालों का फूलापन कम होकर नाक नाश्क में तीखापन(शार्पनेस ) दिखाई पड़ने लगता है। जो लोग उपरोक्त प्रक्रिया अपना लेते हैं उन्हें लाभ मिलता है किन्तु मात्र 20 प्रतिशत लोगों में सौन्दर्य वर्धन होता है ।शेष 80 प्रतिशत लोगों को सौन्दर्य लाभ इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि वे ईर्ष्या, द्वेष, लोभ, क्रोध आदि व्यथाओं से ग्रसित होते हैं| ये मानसिक बीमारियाँ हैं जो हमारी सुंदरता को दिन प्रतिदिन कम करते जाते हैं |ये हमारे शरीर पर निरंतर प्रतिकूल असर डालते हैं जिसकी झलक हमारे चेहरे पर आँखों त्वचा केश पर पहले दिखाई देती है । उपरोक्त बातों का सारांश है कि यदि हम सुन्दर दिखना चाहते हैं तो हमें जीवन में अनुशाशन लाना होगा और सबसे महत्वपूर्ण बात है की हमें अपनी सोच को अच्छा करना होगा अथवा सुन्दर बनने के लिए सुन्दर सोचना पड़ेगा

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